जय अनसूयात्मज श्री दत्तात्रेय आरती अवधूता,
सिद्ध मुकुटमणि ब्रह्मज्ञानी सुरनरभ्रमहर्ता ।धृ।।

मदनमनोहर ध्यान दिगंबर शमवी मम चित्ता,
चरणि पादुका कटी मेखला जटामकुट माथा ।।१।।

पुराण परूषोत्तमा, त्वा धारिले अगाणित अवतारा,
श्रीपाद श्रीवल्लभ नृसिंहसरस्वती दातारा ।।२।।

मूढमति अति पतित दीन परि आलो शरण तुला,
कृपामृते निजस्वरूपी रमवूनी उध्दरी दासाला ।।३।।

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